35.1 C
New Delhi
June 22, 2021
kaalasach
Breaking News
रोजगार शहर

कामयाबी…..अब कैंसर का हो सकेगा भांग से इलाज, पन्तनगर सीमैप के वैज्ञानिकों ने ढूंढा कैंसर जैसी घातक बीमारियों के इलाज का फार्मूला।

पन्तनगर: एशिया के सुप्रसिद्ध कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में दावा किया है कि अब कैंसर जैसी घातक बीमारियों का इलाज भांग से हो सकेगा। सीमैप के वैज्ञानिक इसके पौधे से निकलने वाले औषधीय तत्वों से गम्भीर बीमारियों की दवा बनाने के शोध कार्य में जुट गए हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि जल्द ही इसके औषधीय तत्वों से कैंसर, मिर्गी और डिप्रेशन आदि गम्भीर बीमारियों की दवाई बनाई जा सकेगी।

आपको बता दें कि उत्तराखंड के ज़िला उधम सिंह नगर के पन्तनगर में एशिया का सबसे सुप्रसिद्ध कृषि विश्वविद्यालय है जिसमें सीमैप का अनुसंधान केंद्र है जहाँ वैज्ञानिक हर प्रजाति के पेड़-पौधों के औषधीय तत्वों पर शोध का कार्य करते हैं। ऐसा ही शोध उन्होंने उच्च हिमायल क्षेत्र में पाये जाने वाले भांग के पौधे पर किया जिसमें पता चला कि इस पौधे में ऐसे तत्व प्रचुर मात्रा में मौज़ूद हैं जिनसे घातक बीमारियों का इलाज सम्भव है और इन बीमारियों से जूझ रहे लोगों का इलाज इसके औषधीय तत्वों से बनी दवा से किया जा सकता है।

इस शोध के लिए सीमैप के वैज्ञानिकों ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों से भांग (कैनाबिस) की लगभग 60 प्रजातियों का चयन कर प्रजनन विधि एवं सस्य तकनीक के माध्यम से टीएचसी-ए, सीबीडी और कैनाविनायड जैसे अधिकतम मात्रा वाले रासायनिक तत्वों से युक्त भांग के पौधों की एक प्रजाति विकसित की और जिसमें उन्हें कुछ हद तक सफलता हाथ लगी है। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द ही विकसित इस प्रजाति के पौधों से निकलने वाले औषधीय तत्वों से कैंसर एवं अन्य गंभीर बीमारियों के लिए कारगर दवाई भी बनाई जा सकेगी। इन तत्वों का इस्तेमाल कैंसर, मिर्गी और डिप्रेशन आदि बीमारियों में प्रयोग होने वाली दवाओं में किया जा सकेगा। यह दावा सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिस्ट एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) के उपक्रम सीमैप (केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान) के वैज्ञानिकों ने उच्च हिमालयी भांग के पौधों पर एक साल तक किये अपने शोध के आधार पर किया है जिससे निकलने वाले औषधीय तत्वों से गम्भीर बीमारियों का इलाज सम्भव है। इस सफलता से अब उत्तराखंड में पायी जाने वाली भांग से भी कैंसर जैसी घातक बीमारी की दवा बनायी जा सकेगी।

इस सम्बन्ध में सीमैप के वैज्ञानिक डॉ राकेश उपाध्यक्ष ने बताया कि इस शोध की जानकारी मिलते ही मुंबई की एक संस्था ने सीमैप अनुसंधान केंद्र को जनवरी 2019 में 98 लाख की परियोजना सौंपी थी। इस परियोजना के तहत उच्च हिमालयी क्षेत्र में पायी जाने वाली भांग की लगभग 60 प्रजातियों की पौध एकत्र कर प्रजनन विधि एवं सस्य तकनीक द्वारा उच्च गुणवत्ता युक्त भांग की पौध तैयार की गई जिसमें वैज्ञानिकों को कुछ हद तक सफलता भी हाथ लगी है। जल्द ही भांग की इस नई प्रजाति से निकलने वाले रासायनिक तत्व टीएचसी, सीबीडी, केनाविनायड और टीएचसी-ए आदि के प्रयोग से कई प्रकार की गम्भीर बीमारियों जैसे कैंसर, मिर्गी, डिप्रेशन आदि की दवा बनाने में मदद मिलेगी। भांग की विकसित इस नई प्रजाति में वैज्ञानिकों की टीम ने अभी तक टीएचसी की मात्रा 11.50 प्रतिशत तक पहुंचा दी है जिसे वैज्ञानिक ओर अधिक बढ़ाने में जुटे हुए हैं। जिसकी मदद से कैंसर, मिर्गी और डिप्रेशन जैसी गम्भीर बीमारियों की दवा बनाई जायेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भांग में कई प्रकार के औषधीय गुण पाए जाने से दुनिया की करीब 2.5 फ़ीसदी आबादी यानी 14.7 करोड़ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं जिससे दुनिया में इसका इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

वहीं श्री उपाध्यक्ष ने भांग के सही रूप में इस्तेमाल करने के निम्नलिखित फायदे भी बताये :-

१. भांग इंसान के सीखने और याद करने की क्षमता को बढ़ाती है। यदि भांग का उपयोग सीखने और याद करने के दौरान किया जाता है तो भूली हुई बातें आसानी से याद की जा सकती हैं।

२. इंसान में एकाग्रता की कमी और मानसिक बीमारी होने पर डॉक्टर भी सही मात्रा में इसके सेवन की सलाह देते हैं।

३. बार-बार पेशाब करने वाले व्यक्ति को इलाज के तौर पर भांग के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है।

४. कान का दर्द होने पर भांग की पत्तियों के रस को कान में डालने से दर्द से राहत मिलती है।

५. ज़्यादा खांसी होने पर भांग की पत्तियों को सुखाकर उसमें पीपल की पत्ती, काली मिर्च और सोंठ मिलाकर सेवन करने की सलाह दी जाती है।

Related posts

पढ़िये…बाज़पुर बहुचर्चित भूमि प्रकरण मामले में कांग्रेस का गुस्सा उबाल पर, पार्टी दिग्गजों ने तहसील परिसर में दिया धरना, कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर उड़ाई गई धज्जियां।

kaalasach

देखिये…..अब पूरा होगा अधूरे पड़े पं0 दीनदयाल उपाध्याय पार्क का निर्माण कार्य, जल्द साकार होने वाला है क्षेत्रवासियों का सपना, 5 लाख हुए मंजूर।

kaalasach

देखिये वीडियो…..पशुपालन विभाग के संचालक केके जोशी प्रेस वार्ता में क्या बोले!

kaalasach

देखिये…..काला सच विशेष, कोविड-19 स्पेशल। (खतरा अभी टला नही है लोग इसे हल्के में न लें।)

kaalasach

देखें…..राइस मिलरों और किसानों में धान खरीद को लेकर विवाद जारी, और फिर…..

kaalasach

देखिये…..किसने बताया प्रदेश के मुख्यमंत्री को सुल्फिया

kaalasach

Leave a Comment