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June 22, 2021
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देखिये…..हालात-ए-किसान! जब फसल का उचित दाम नही मिला तो जोत डाली पूरी फसल…..!

रिपोर्ट – अनीस रजा
स्थान – सितारगंज

सितारगंज : एक तरफ सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करती है, तो दूसरी तरफ किसान फसल की लागत तक नहीं निकाल पर रहे। सरकारी विभाग किसानों को आय बढ़ाने का आश्वासन देकर ऐसी चीजों की खेती करवा देते हैं कि जिसमें उसकी फसल की लागत तक नहीं निकलती। ऐसा ही वाक्या विकास खंड के ग्राम खुनसरा के तीन किसानों के साथ हुआ। जिन्होंने सरकार की योजना के तहत केले की फसल बोई और करीब डेढ़ साल में फसल तैयार हुई, तो बाजार में उचित दाम नहीं मिला। अब कर्ज में डूबे क्षुब्ध किसानों ने केले की फसल को ही ट्रैक्टर से जोत दिया है।
सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से केले की खेती की योजना बनाई थी। जिसके तहत उद्यान विभाग ने मनरेगा के तहत किसानों को केले की पौध मुहैया करानी थी। इस योजना में लाभार्थी काश्तकारों को विकास खंड से मनरेगा के तहत बुआई, निराई आदि के लिए मजदूरी दिये जाने का प्रावधान भी था। इससे प्रभावित होकर ग्राम खुनसरा के काश्तकार राजेश कुमार, शेर सिंह व रमेश कुमार ने अपनी चार एकड़ भूमि पर केले की खेती करने का विचार बनाया। जून 2019 में उद्यान विभाग ने उन्हें केले की पौध मुहैया कराई। इस पर काश्तकारों ने चार एकड़ भूमि पर मनरेगा से मिली मजदूरी से केले की पौध लगा दी।
पौध लगाने के बाद खेत की जुताई, खाद व उर्वरकों का खर्च किसानों ने खुद उठाया। इन पर बीस माह के दौरान उनके तीन से साढ़े तीन लाख रुपये खर्च हो गये। लगातार फसल की देखभाल की गई। अब जब फसल तैयार हुई, तो खरीददारों की खोज शुरू की गई। कई दिन लगाने के बाद भी किसानों को केले के दो रुपये प्रति किलोग्राम के खरीददार नहीं मिले। यह देख काश्तकारों के होश फख्ता हो गये। हिसाब लगाया गया, तो पता चला कि इस रेट पर तो केले की फसल तैयार होने तक लगी लागत का आधा भी प्राप्त नहीं होगा। काफी कोशिशों के बाद भी जब रेट नहीं मिला, तो क्षुब्ध किसानों ने खेत में खड़ी केले की फसल को ट्रैक्टर से जोत दिया। काश्तकारों का कहना था कि केले की फसल लगाकर वे कर्ज में डूब गये हैं। साथ ही बीस माह तक खेत में कोई और फसल नहीं बो सके, वह घाटा अलग। ऐसे में सरकार को किसानों से फसल बोने को कहने से पूर्व उसके विपणन की व्यवस्था करनी चाहिये। अन्यथा किसानों को धोखे में नहीं रखा जाना चाहिये।

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